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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

औली यानि भारत में स्विट्ज़रलैंड का मजा

हिमालय पर्वत की बर्फ से लदी ऊँची पर्वत चोटियाँ सदैव से ही यहाँ आने वाले पर्यटकों को आकर्षित एवं उत्साहित करती रही है। उतराखंड राज्य की भूमि से प्रमुख रूप से भारत वर्ष की दो अति पावन और पवित्र नदियाँ,गंगा और यमुना का उदगम हुआ है। इसी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता को निहारने की चाहत में हम उतराखंड जा पहुँचे। शहर की भागती-दौड़ती जिंदगी से दूर औली एक बहुत ही बेहतरीन पर्यटक स्थल है।ऊँचे ऊँचे आसमान छूते सफ़ेद चमकीले पहाड़ मीलों दूर तक फैली सफ़ेद बर्फ की चादर दूर-दूर तक दिखते बर्फीली चोटियों के दिलकश नज़ारे ! नहीं भई.... इसके लिए स्विट्जर्लेंड जाने की जरुरत नहीं ऐसी जगह तो हमारे पास भी मौजूद है हम बात कर रहे हैं औली की जो की उत्तराखंड में है। औली इन दिनों पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा जगह बन गया है. प्राकृतिक सुंदरता से ओतप्रोत यह जगह भारत का सबसे पोपुलर टूरिस्ट प्लेस है. उतराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास समुद्र तल से ९००० हजार फिट की ऊँचाई पर यह स्थित है. जोशीमठ से औली जाने के लिए दो रास्ते है एक तो सड़क का और दूसरा रोपवे का, करीब चार किलोमीटर लम्बे रोपवे से जाने पर इस जन्नत का नज़ारा और भी खूबसूरत हो जाता है। जोशी मठ से कुछ ही दूरी पर चिनाब झील है इस स्थान तक पहुंचने के लिए घने जंगल और मखमली घास के मैदान से होते हुए जाना पड़ता है।
औली की तरफ पर्यटकों की रुख सबसे बड़ी वजह स्क्यिंग के लिए पहाड़ों के बेहतरीन ढलाने है. ये ढलाने दिसम्बर के मध्य से अप्रैल तक सफेद कालीन जैसी बर्फ की मोटी चादर से ढकी रहती है. ढलानों पर जमीं बर्फ और ओक के जंगल स्कीईंग के दीवानों के दिल जित लेते है. जिन लोगों ने कभी स्कीइंग करने या सीखने के अरमान संजोये रखा हो, उनके लिए यह बहुत अच्छी जगह है.यहाँ गढ़वाल मण्डल विकास निगम ने स्की सिखाने की व्यवस्था की है। मण्डल द्वारा 7 दिन के लिए नॉन-सर्टिफिकेट और 14 दिन के लिए सर्टिफिकेट ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग हर वर्ष जनवरी-मार्च में दी जाती है नंदा देवी के पीछे सूर्योदय देखना एक बहुत ही सुखद अनुभव है। यह औली से ४० किमी की दूरी पर है.इसके अलावा बर्फ गिरना और रात में खुले आकाश को देखना मन को प्रसन्न कर देता है प्रकृति ने यहाँ चारो तरफ अपने सौन्दर्य को खुल कर बिखेरा है। बर्फ से ढकी चोटियों और ढलानों को देखकर मन बाग़-बाग़ हो जाता है। यहां पर कपास जैसी मुलायम बर्फ पड़ती है और पर्यटक खासकर बच्चे इस बर्फ में खूब खेलते हैं।
पहुंचने के साधन:
चूंकि औली को अभी तक रेल–मार्ग और वायु–मार्ग द्वारा सीधे नहीं जोड़ा गया गया है, अत: इन दोनों साधनों द्वारा यहां तक नहीं पहुंचा जा सकता। यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। वहां से सड़क–मार्ग द्वारा (बस या टैक्सी से) औली पहुंचा जा सकता है। जबकि सबसे निकटतम एरपोर्ट देहरादून में है जो औली से २७९ किमी दूर है. टैक्सी और कैब देहरदुन एअरपोर्ट से हमेशा उपलब्ध रहती है वैसे, देश के हर प्रमुख शहर से ऋषिकेश सड़क–मार्ग द्वारा भी जुड़ा हुआ है। अत: बस या टैक्सी या कार द्वारा देश के किसी भी भाग से औली पहुंचा जा सकता है।
बेहतर समय:- हालाँकि गर्मी के दिनों में औली में काफी मजा आता है बरसात के मौसम में अनगिनत प्रकार के फूल–पौधे देखने को मिलते हैं, लेकिन इस स्थान की विशेषता और महत्ता को देखते हुए यहां दिसंबर के मध्य से अप्रैल तक की अवधि में आने पर यात्रा अधिक सार्थक होती है।
यहाँ ठहरने के लिए कहाँ रुके: औली में रूकने के लिए क्ल्फि टॉप रिसोर्ट सबसे अच्छा स्थान है। जहाँ से आप नंदा देवी, त्रिशूल, कमेत, माना पर्वत, दूनागिरी,बैठातोली और नीलकंठ के बहुत ही सुन्दर दृश्य का आनंद ले सकते है इसके आलावा गढ़वाल मंडल विकास निगम के द्वारा डीलक्स झोपड़ियों के साथ बंगले की वयवस्था की गयी है जहाँ एक दिन के करीब ७०० रूपये का शुल्क लगता है।
यह दैनिक 'नया इंडिया' में प्रकाशित...

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